'मोरबी हादसे वाले दिन बिके थे 3165 टिकट, केबल में जंग' : फॉरेंसिक रिपोर्ट

News18 | 4 days ago | 23-11-2022 | 02:00 am

'मोरबी हादसे वाले दिन बिके थे 3165 टिकट, केबल में जंग' : फॉरेंसिक रिपोर्ट

अहमदाबाद. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजरात के मोरबी में पुल गिरने को एक ‘भारी त्रासदी’ करार दिये जाने के एक दिन बाद मंगलवार को एक फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दुर्घटना के दिन 30 अक्टूबर को 3,165 टिकट लोगों को बेचे गए थे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केबलों में जंग लग गई थी और पुल के लंगर टूट गए थे. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी वकील ने जिला अदालत में रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि मूल रूप से एक सदी पहले बनाए गए पुल की भार सहने की क्षमता का ठीक से आकलन नहीं किया गया था.फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट ने सस्पेंशन ब्रिज के रखरखाव, संचालन और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कंपनी ओरेवा ग्रुप को जांच के दायरे में ला दिया है. ब्रिटिश काल के दौरान बने इस पुल में पिछले महीने एक दुखद दुर्घटना हुई थी, जिसमें 140 से अधिक लोग मारे गए थे. पुल हादसे के बाद पुलिस ने 31 अक्टूबर को ओरेवा समूह से संबद्ध चार व्यक्तियों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया था. उन पर गैर इरादतन हत्या और अन्य प्रासंगिक धाराओं का आरोप लगाया गया था. पुल के संचालन एवं रखरखाव का जिम्मा संभाल रहीं कंपनियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है.‘आफताब पूनावाला ने कोर्ट में श्रद्धा वालकर की हत्या की बात कबूल नहीं की’ : आरोपी के वकील का खुलासारिपोर्ट में कहा गया है कि केबल को एंकर से जोड़ने वाले बोल्ट भी ढीले थे. दुर्घटना के बाद प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि पुराने केबल एक नए और भारी फर्श का भार नहीं उठा सकते थे. मोरबी नगरपालिका ने गुजरात उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि पुल को कंपनी द्वारा नगर निकाय की बिना किसी पूर्व स्वीकृति के और किए गए मरम्मत कार्य के बारे में सूचित किए बिना फिर से खोल दिया गया था. नागरिक निकाय ने कहा था, “यह नागरिक निकाय और फर्म के बीच 2022 के समझौते का उल्लंघन था, जिसमें कहा गया था कि पुल को ‘उचित रूप से पुनर्निर्मित’ करने के बाद ही खोला जाएगा.”इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीड़ितों को ‘सम्मानजनक’ मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय-समय पर निगरानी करने को कहा. प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इन दलीलों को भी खारिज कर दिया कि मोरबी जैसे हादसे फिर नहीं हों, इसके लिए एक जांच आयोग गठित किया जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने घटना की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका समेत कुछ अर्जियों पर विचार करने से मना करते हुए कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पहले ही हादसे का स्वत: संज्ञान लिया है और उन्होंने अनेक आदेश पारित किये हैं.गौरतलब है कि गुजरात के मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल मरम्मत के बाद खोले जाने के पांच दिन बाद 30 अक्टूबर को ढह गया था और हादसे में महिलाओं, बच्चों सहित 141 लोगों की जान चली गई थी.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|Tags: Gujarat, Morbi Bridge

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